Aviram’s Angle

कश्मीर और दिल्ली की बात ही अलग है। कुछ को शब्दों में बयां कर पाया कुछ को नहीं। जैसलमेर और इलाहबाद में तो इस तरह खो गया था की तस्वीर क्लिक करने का मौका ही नहीं मिला। और फिर खोता भी क्यों न महादेवी वर्मा, निराला और अकबर इलाहाबादी जैसी शख्सियतों ने जहाँ की आबों हवा में रंग भर दिया हो वह जगह साधारण तो हो ही नहीं सकती। इलाहबाद पर रचा धर्मवीर भारती जी का गुनाहों का देवता, उसे तो पढ़ लेने में ही इलाहबाद खुद को प्यारभरा तोहफा बना आपको सौंप देता है। प्रणाम हो समस्त रचनाकारों को जिन्होंने इलाहबाद को हिंदी साहित्य की राजधानी बना के रख दिया था। इस चर्चा में जैसलमेर को भूल जाना कतई संभव नहीं। धोरां री धरती में मार्च करते जवान, देश के लिए प्यार देखते ही बनता है। हाँ और दोस्तों तनोट माता का मंदिर अगर अपने नहीं देखा तो जैसलमेर आपको वापस जाना पड़ेगा। वहां की आरती देश के जवानों से सुनकर यक़ीनन आप वह ऊर्जा महसूस कर सकते हो जो जवानों को हर पल सरहदों पर रोके रखती है। जय हिंदी, जय हिन्द…

Jammu & Kashmir

Chittor Garh

Point of View